Tuesday, 12 December 2023
जय जय हे गुरुदेव
Saturday, 16 September 2023
आओ तुम भी सुनो
Tuesday, 18 July 2023
जो अभी तुम हो!
जो अभी तुम हो!
कोई होने दे रहा है तुम्हें
तो तुम हो!
जो अभी तुम हो!
सुबह वो ही, लाता है वो ही शाम भी
वह तुम में खास लाता है, आम भी
प्यास लाता है, और लाता है जाम भी
तुम कब के निकल लिये होते
वह उठाता है तुम्हें, सुलाता है शाम भी
कौन सी साँस आखरी हो जाए
खो सकते हो तन भी और यह नाम भी।
कोई होने दे रहा है
तो तुम हो।
ये मालो असबाब,
तरक्की और तुम्हारा ये काम भी
तुम्हारा ईमान और तुम्हारा हराम भी
सारे नाते और ये रिश्ते तमाम भी
मुठ्ठी मे रेत के मानिन्द गुलाम भी
एक खटके में खत्म हों जायें
इन सबके सभी काम भी।
कोई होने दे रहा है
तो तुम हो।
रामनारायण सोनी
१७.०७.२३
Saturday, 15 July 2023
मैं थोड़ा थोड़ा छूट गया हूँ
मैं थोड़ा थोड़ा छूट गया हूँ
माँ बाबा की गोदी में मैं कुछ थोड़ा सा छूट गया हूँ
तुतलाती बोली ले उनके कानों में कुछ छूट गया हूँ
पलटा पीछे तो देखा वे कहीं दूर जो निकल गये हैं
खेल नियति के देख देख मैं बचपन में ही खूट गया हूँ
उन पल की पदचाप सुनी तो तिनका तिनका टूट गया हूँ
खड़िया की टूटी कलमों का मुँह में स्वाद अभी बाकी है
थूँक लगा कर लिखा मिटाकर पट्टी कैसे ढाँकी है
छड़ी गुरू की हाथ पड़ी थी अब भी मुझको याद बड़ी है
फिर भी सिर पर नेहिल उनकी छुअन अभी बाकी हैन्
पहले गुरू की पहली शिक्षा घूँट घूँट कर तभी पिया हूँ
उन पल की पदचाप सुनी तो तिनका तिनका टूट गया हूँ
अन्नी चन्नी, लंगड़ी में कुछ अंगबंग और चोक चंग में
सोलह सार मंडी फर्शी पर रोत्ता खेले यार संग में
होली के वे शक्कर गहने, पहने फिर कुट कुट खाये थे
कैसी शरम सरल बचपन में खेले खाये अजब ढंग में
उन सोने चाँदी के दिन में थोड़ा थोड़ा छूट गया हूँ
उन पल की पदचाप सुनी तो तिनका तिनका टूट गया हूँ
रामनारायण सोनी
०७.०७.२३
कितना हो कर देखा मैंने
कितना हो कर देखा मैंने
परछाईं में जियूँगा
परछाईं में जियूँगा
Saturday, 1 July 2023
मन गीत कोई गाने लगता है
नवगीत
मन गीत कोई गाने लागा है
विकल हृदय और तृषित अधर पर
जब से तेरी नवगुलाब की
पंखुड़ियों की छुअन मिली है।
मन की तपती हुई धरा को,
ओ शुष्क कंठ को
अमित नेह के रुचिर मेघ की
मीठी बूँद मिली है।।
मुझमें इक पावस जागा है।
मन गीत कोई गाने लागा है।।
शतदल से इस हृदय पत्र पर
बैठे हैं शबनम के मोती
अम्बर की चूनर में राका
तारक की मणिमाल पिरोती
प्रखर प्रेम में सनी वर्तिका
थाम खड़ी है जगमग ज्योति
ऐसे में पढ़ने को आतुर
तेरे इन नयनों की पाती
यह प्रेम दीप ऐसे जागा है।
मन गीत कोई गाने लागा है।।
जी चाहे फिर प्यास लगे,
फिर नयनों में आस जगे
फिर सीपी के फलक खुले वो
मोती का सा प्रेम पगे।
रीती गागर, सूने पनघट,
पनिहारिन के रसरी के संग
सर सर कर आती जाती
स्वाँस जगे प्रश्वाँस जगे।।
अवगुण्ठन को जी भागा है।
मन गीत कोई गाने लागा है।।
रामनारायण सोनी
०१.०७.२३
Friday, 30 June 2023
Tuesday, 27 June 2023
दो घूँट प्यार के ला देना
Monday, 26 June 2023
गीत सृजन के गावेंगे
Thursday, 22 June 2023
दो दिये दो जिन्दगी
Sunday, 18 June 2023
स्मृतियों में सदा जियूँगा
स्मृतियों में सदा जियूँगा
