नवगति नवलय
. ll नवगति, नवलय, ताल-छन्द नव ll * सम्वेदनाओं के विविध आयाम *
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Saturday, 15 July 2023
परछाईं में जियूँगा
परछाईं में जियूँगा
तुम्हारी स्निग्ध चाँदनी में
मेरी परछाई और भी ठण्डी हो जाती है
मेरे मन तन में उठती अगन भी
इसे पिघला न सकेगी
जल भी जाए सब कुछ
सम्हाल कर रखना तुम
मेरी इस परछाई को
ताकि मैं इसमें जी सकूँ
तुम्हारे लिये!
रामनारायण सोनी
०५.०७.२३
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