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Tuesday, 18 July 2023

जो अभी तुम हो!

जो अभी तुम हो!

कोई होने दे रहा है तुम्हें
तो तुम हो!
जो अभी तुम हो!
सुबह वो ही, लाता है वो ही शाम भी
वह तुम में खास लाता है, आम भी
प्यास लाता है, और लाता है जाम भी
तुम कब के निकल लिये होते
वह उठाता है तुम्हें, सुलाता है शाम भी
कौन सी साँस आखरी हो जाए
खो सकते हो तन भी और यह नाम भी।
कोई होने दे रहा है
तो तुम हो।

ये मालो असबाब,
तरक्की और तुम्हारा ये काम भी
तुम्हारा ईमान और तुम्हारा हराम भी
सारे नाते और ये रिश्ते तमाम भी
मुठ्ठी मे रेत के मानिन्द गुलाम भी
एक खटके में खत्म हों जायें
इन सबके सभी काम भी।
कोई होने दे रहा है
तो तुम हो।

रामनारायण सोनी
१७.०७.२३

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