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Monday, 26 June 2023

गीत सृजन के गावेंगे

बिना छेद की बंसी ने गीत कोई क्या गाया है?
बिना पीर के माता ने पूत कोई क्या जाया है?

तुम चलो उजालों की धरती पर छाया साथ रहेगी
मिले भले पूनम की रातें मावस भी तो तुम्हें मिलेगी
सुख की बिजली यदा कदा अँधियारे में दमकेगी
दुःख की काली घनी बदरिया मौजूद सदा रहेगी
बिना छेद की बंसी ने गीत कोई क्या गाया है?
बिना पीर के माता ने पूत कोई क्या जाया है?

बैठ शिखर पर ध्वजा बिचारी सदा पवन से लड़ती है
मेंहदी सिल पर घिस-घिस कर ही हाथों में रचती है।
ऊँचे वृक्षों महलों पर ही बिजली अक्सर गिरती है
कितना तपा हिमालय पूछो हमको तब गंगा मिलती है।।
बिना छेद की बंसी ने गीत कोई क्या गाया है?
बिना पीर के माता ने पूत कोई क्या जाया है?

कितने सहे प्रहार करारे पत्थर ने मूरत बनने तक
टूटे कितने पत्थर कण-कण धारा से प्रपात होने तक।
मिट्टी ने गल-तप कर ही तो रम्य इमारत बनती है
बीज मिटा है गल कर सड़ कर पादप के आने तक।।
बिना छेद की बंसी ने गीत कोई क्या गाया है?
बिना पीर के माता ने पूत कोई क्या जाया है?

हम जीवन की अक्षय निधि को पा कर भी बिसरे हैं
छोटी छोटी मुश्किल से भी धूल कणों के से बिखरे हैं।
जितने भी अवतार हुए वे अन्तःपीड़ा से गुजरे हैं
पर साहस और धर्म पर चल और अधिक निखरे हैं।।
बिना छेद की बंसी ने गीत कोई क्या गाया है?
बिना पीर के माता ने पूत कोई क्या जाया है?

जंगल हैं तो कभी कभी वे दावानल भी आवेंगे
कश्ती को भी सागर में वे निर्मम तूफान सतावंगे
काँटे कितने शाख उगेंगे फिर भी फूल खिलावेंगे
हार जीत का ख्याल भूल हम गीत सृजन के गावेंगे
बिना छेद की बंसी ने गीत कोई क्या गाया है?
बिना पीर के माता ने पूत कोई क्या जाया है?
बिना छेद की बंसी ने गीत कोई क्या गाया है?
बिना पीर के माता ने पूत कोई क्या जाया है?

रामनारायण सोनी
२७ .०६.२३

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