नवगति नवलय
. ll नवगति, नवलय, ताल-छन्द नव ll * सम्वेदनाओं के विविध आयाम *
Pages
Home
Sunday, 11 June 2023
चुभते हुए ख्वाब
चुभते हुए ख्वाब
कुछ ख्वाब! चुभते बहुत हैं
तैर जाती है
गुलमोहर के फूलों की रक्तिमा
आँखों के इन सकोरों में!
और फिर भर जाती है अचानक ही
सांभर झील की सी नमक-गन्ध
ये कँटीले ख्वाब!
चुभते बहुत हैं
रामनारायण सोनी
१२.०६.२३
No comments:
Post a Comment
Newer Post
Older Post
Home
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment