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Friday, 9 June 2023

तुम न आए

दुआ करो कि अब मेरी
       याददाश्त ही खो जाए।
दिल के दरिया में बहते पल 
       लौट कहीं न फिर आ जाएँ।।

बीते तन और रीते मन में
        फिर से ज्वार नहीं आ जाए।
अवगुंठन के शहदी सपने
        नयन कोर में धुल न जाए।।

सांझ सकारे अपने द्वारे
        देहरी का दीपक कहता है।
सब जग लौटा ठौर ठौर पर
        बाट निहारूँ, तुम ना आए।।

जो कहानी जी रही मैं
        मर चुकी कब की उसी में।
मौत ने लिख दी इबारत
        मैं जली फिर फिर उसी में।।

रामनारायण सोनी
6.6.23

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