Pages

Tuesday, 27 June 2023

दो घूँट प्यार के ला देना


दो घूँट प्यार के ला देना

नहीं चाहिये सोम मुझे दो बूँद नेह की मिल जाए
नहीं मलय का चन्दन चाहूँ रिश्तों का लेपन मिल जाए।
मैं समझूँगा झोली में सब हीरे माणिक रत्न भरे है
नजर प्यार की पल भर को ही हौले से गर छू जाए।।
दो पल मुझे जिला देना, 
दो घूँट प्यार के ला देना।।

मेघदूत देखे बहुतेरे जो ले प्रेम पत्र उड़ते फिरते 
उपवन में चहके चंचरीक गुन गुन कर गुंजन हों करते।
मैं तो उन मीठे शब्दों की प्यास लिये बैठा हूँ
जो दिल के छालों पर मरहम सा लेपन हों करते।।  
दो पल मुझे जिला देना, 
दो घूँट प्यार के ला देना।। 

नहीं चाहिये इन्द्रधनुष के वे चटकीले से सात रंग
अमलतास की पीली लटकन झालर सा वह ढंग।
मेरी चाहत मसि पाने की जिससे लिख डालूँ 
जीवन में अपनों संग जीने वाली अलमस्त तुरंग।। 
दो पल मुझे जिला देना, 
दो घूँट प्यार के ला देना।। 

रामनारायण सोनी
२८.०६.२३

No comments:

Post a Comment