. ll नवगति, नवलय, ताल-छन्द नव ll * सम्वेदनाओं के विविध आयाम *
ए पुष्प! तुम्हारे हृदयकोष को बनाया है परमात्मा ने जगत में परागण के निस्तार और संचार के लिये मुझे. . . मुझे तुम्हारा हृदय होना है
रामनारायण सोनी ०५.०२.२०२२
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