मैंने तैयार कर लिया है
खुद को
अपने पुनर्सृजन के लिये,
मैं जानता हूँ
कई ध्वंस होंगे मुझ में
रूढ़ियाँ टूटेंगी कई!
नव कोंपलों के प्रस्फुटन में
पीड़ाएँ जन्मेंगी नई नई!!
फिर भी..
तोड़ कर उस अतीत के
राज प्रासाद को
बनना है एक अदद
छोटा सा आशियाना
अदना सा, अपना सा
अपने लिये, अपनों के लिये
रामनारायण सोनी
३.२.२०२२
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