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Sunday, 13 February 2022

जिन्दगी जिये जा रही है

कैसे कह दूँ
कि मेरे पास वक्त है
मुमकिन है, 
कि मैं ही वक्त की अमानत हूँ
कैसे मान लूँ..
कि मैं तुम्हारा हूँ?
भले ही तुम मेरे हो
कैसे समझ लूँ...
कि आकाश सिर्फ परिन्दों के लिये है?
जबकि मैं भी जिन्दा हूँ
उसी की प्राण वायु से

फिर भी न जाने क्यूँ 
मैं कहता हूँ, मानता हूँ, समझता हूँ
कि मैं समय की गोद में हूँ, 
तुम मेरे हो,
तभी तो..!
यह जिन्दगी यूँ ही
जिये चली जा रही है

रामनारायण सोनी 
१४.०२.२२



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