सुन!
ऐ मेरे दिल!!
एक लम्बी उम्र गुजार दी है तुमने
लोगों की बातें
और संगीत सुनने में
खोये भी रहे
उन महफ़िलों में, वादियों में, लयों में
वक्त पुकारता है अब तुम्हें
कि लिखो अपने गीत
गाओ और गुनगुनाओ अपने ही
गीत-संगीत
गीत इस जी हुई जिन्दगी के
संगीत अपने ही मचलते मिजाज का
रामनारायण सोनी
२१.१२. २०२२
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