परमात्मा के अग्रदूत
सुन ए मानव!
मौजूद है तुझ में
पवित्र संगम पार्थिव और चेतना का
नश्वर और अविनश्वर का
पर मौजूद भी है तुम में
एक अन्तर्जगत अन्तर्द्वन्द्वों का
सत्य और अनृत का
पीयूष और मृगजल की मरीचिकाओं का
नहीं भाग सकोगे कभी भी
अपने हत भाग्य, दुर्भाग्य से तुम!
जान सको तो जानो
फिर भी, हाँ फिर भी
श्रेष्ठतम सृजन हो तुम इस धरा पर
जगत के रचयिता, नियन्ता का
तुमने ही खोजा और जाना है...
प्रकाश, पावक, पवन, पवि और पुरुषार्थ
समझा है क्रम से....
अस्तित्व प्रकृति का आत्मा-परमात्मा का
अग्रदूत हो तुम इस जगत में...
ईश्वर और पमात्म सत्ता के
तुम्हें ध्यान रहे, भान रहे
ए श्रेष्ठ मानव!
रामनारायण सोनी
१८.०२.२२
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