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Friday, 2 September 2022

खामोश चिट्ठी

तुम्हारे नाम से शुरू मेरे नाम से खत्म मेरी चिट्ठी
इस बीच कोई लिखा हाल न खबर ये मेरी चिट्ठी
हर बार फिर भी तुमने सिद्दत से पढ़ी मेरी चिट्ठी
मेरे दिल से तेरे दिल का नाजुक जोड़ मेरी चिट्ठी
हो गया होगा महसूस उन लफ़्जों और जुबान का
जो बयान करती है जो खामोशियाँ मेरी चिट्ठी
इन्हीं खामोशियों ने फिर गज़ल गाई नज़्म गाई
बिना बोले भी कितना बोलती है ये मेरी चिट्ठी

रामनारायण सोनी

२.०९.२२


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