समझ नहीं पा रहा हूँ मैं
यह मेरी स्मृति है?
इतिहास का स्पर्श है?
ममता की ओढ़नी है?
पुलक प्रेम का आकाश है?
या उन पलों का वर्तमान में साकार हो जाना है?
अचानक मेरे हाथ पैर छोटे छोटे हो गये हैं,
नन्हीं सी मेरी उँगली को
अचानक पकड़ कर मुझे खींच लिया है,
फिर अपने मृदुल करों से उठा कर
मुझे अपने हृदय से चिपटा लिया है
और!
अचानक से माँ तुम कहाँ चली गई?
रामनारायण सोनी
१२.०९.२२
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