सुचिते!
माना कि तुम समुन्दर !
मैं बस कुछ बूँद माँगता हूँ!!
सुनयने!
थोड़ा सा वक्त चाहिये
मेरी उन बातों को सुनने को
जो मेरी पीड़ाएँ कहना चाहती है
प्रिये!
मेरे दिल में, ख्यालों में रहना केवल तुम
जब भी मैं होऊँ परेशान
तुम्हारे काँधे पर रख सकूँ सर अपना
जब भी मैं दुनिया के गमों से घिर जाऊँ..
सुस्मिते !
चाहता हूँ कायम रहो.
मेरी आस में, अहसास में, विश्वास !
कि जैसे साथ हो तुम मेरे
फूलों में खुशबू की तरह
रामनारायण सोनी
१२.०८.२२
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