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Sunday, 3 July 2022

तुम आज भी याद आते हो (नज़्म)


तुम आज भी बहुत याद आते हो
क्यों याद आते हो?
इसे न तुम जानते हो
न हम जानते हैं
कि तुम क्यों याद आते हो?
तुम आज भी बहुत याद आते हो

तुम आज भी बहुत याद आते हो
इसे हम तुम से पूछ नहीं सकते
ना ही हम तुम्हें बता सकते 
ये याद हमारे दिल में आती है
यह भी कि क्यों याद आते हो?
तुम आज भी बहुत याद आते हो

तुम आज भी बहुत याद आते हो
फिजाएँ खुद महकतीं हैं
हवाएँ भी मचलती हैं
घटाएँ नाचती फिरती हैं गगन भर में
ये खबर सारी तुम्हारी हैं
तुम्ही तो याद आते हो
तुम आज भी बहुत याद आते हो

रामनारायण सोनी

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