नवगति नवलय
. ll नवगति, नवलय, ताल-छन्द नव ll * सम्वेदनाओं के विविध आयाम *
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Wednesday, 22 June 2022
बावरा मन
यह चाँद है?
या उसका कंगन
ये टूटते हुए तारे हैं?
या जुल्फों से छितरी हुई
बूँदों की बिखरन
यह राजपथ है?
या बस राह की भटकन
इस रात की ये खामोशी
कह रही है...
कितना बावरा हूँ मैं
और मेरा यह मन
रामनारायण सोनी
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