मैंने जब जब निश्छल हो कर पुकारा
उसने ठीक ठीक सुना
मैंने तन्मय हो कर..
सुनना चाहा जब उसे
उसने सुमधुर स्वर में
मुझे "मेरा अपना" कहा
भरोसा उस पर किया जब जब
वह संकटों से निकाल कर लाया मुझे
मैं चलता ही गया उसके पीछे पीछे
उसने मंजिल खिसका दी मेरी पहुँच में
उसने सिखाया काले पानी में तैरना
ताकि दुश्मन भी पीछा नहीं कर सके मेरा
विश्वास मेरी संवेदनाएँ नहीं
अपितु मेरे दृढ़ निश्चय का परिणाम है
वह मेरा सबसे प्यारा है।
मैंने उससे प्रार्थना की....
हे मेरे प्यारे परमात्मा!
तुम मुझे इतना खाली कर दो
कि मैं पूरे का पूरा ही..
तुम्हारी कृतज्ञता से भर जाऊँ !!!
रामनारायण सोनी
११.०५.२२
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