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Tuesday, 20 December 2022

मुक्तावली

फल फूली हर शाख मुखर है मन का मधुबन
आणंद बेली महक रही, भ्रमर गुंजारे गुनगुन
आँगन आँगन सजी रंगोली, माँडन लगे सुहावन
उतरा आज गगन से डोला, वासंती मन भावन
      रामनारायण सोनी
      06.12.2022

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