भीतर झाँको जरा
तुम ही बताओ
क्या वो तुम ही हो?
जो कभी तुम थे।
या फिर तुम्हें लगता है
'मैं' जो लगता था कभी
'मैं' अब वैसा नहीं लगता
सुनो सुप्रिये!
रूहों की जात, औकात, रंग
कभी भी नहीं बदलता।
अपने भीतर पलट कर देख लो जरा।
क्या तुम वही नहीं हो?
रामनारायण सोनी
२७.०९.२२
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