. ll नवगति, नवलय, ताल-छन्द नव ll * सम्वेदनाओं के विविध आयाम *
बड़ी गौर से देखता हूँ, सुनता हूँ, समझता हूँ मेरी अपनी ही पीड़ाओं को वे संदेशवाहिनी है अपने और अपनों के दर्दों की, मर्मों की अच्छी लगती है मुझे मेरी अपनी ही पीड़ाएँ
रामनारायण सोनी ११.१२.२१
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