Pages

Friday, 28 January 2022

मेरी अपनी पीड़ाएँ

बड़ी गौर से
देखता हूँ, सुनता हूँ, समझता हूँ
मेरी अपनी ही पीड़ाओं को
वे संदेशवाहिनी है
अपने और अपनों के
दर्दों की, मर्मों की
अच्छी लगती है मुझे
मेरी अपनी ही पीड़ाएँ

रामनारायण सोनी
११.१२.२१

No comments:

Post a Comment