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Friday, 28 January 2022

बात इत्ती सी


यादें यादों के सागर में 
तैर जाती है 
कुछ इस तरह
बस थोड़ी सी तन्हाई चाहिये

दिल की इस नाव पर 
बाँधो मस्तूल
फेंक दो पतवार
बहने दो उन आवारा सी..
अल्हड़ तरंगो के संग
और फिर कोई लहर आये 
फिर उसके घाट पर
लंगर पड़ जाए
सब कुछ ठहर जाए
हाँ, वो भी और वक्त भी
बस..
बात इत्ती सी है

    रामनारायण सोनी

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