यादें यादों के सागर में
तैर जाती है
कुछ इस तरह
बस थोड़ी सी तन्हाई चाहिये
दिल की इस नाव पर
बाँधो मस्तूल
फेंक दो पतवार
बहने दो उन आवारा सी..
अल्हड़ तरंगो के संग
और फिर कोई लहर आये
फिर उसके घाट पर
लंगर पड़ जाए
सब कुछ ठहर जाए
हाँ, वो भी और वक्त भी
बस..
बात इत्ती सी है
रामनारायण सोनी
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