तुम शाश्वत सत्य सनातन हो
तुम अद्भुत हो, हे वंदनीय! तुम असीम सुख दाता हो
तुम तो मेरे जीवन-धन हो तुम मेरे भाग्य विधाता हो
तुम चिदानन्द आनन्द विभो! और दुःखों के त्राता हो
तुम ही कर्ता हर्ता सब के और जगत के धाता हो
तुम शाश्वत सत्य सनातन हो, प्रतिबिम्बित कण कण में
तुम असीम हो तुम अनन्त तुम हो व्यापक सचराचर में
तुम परमज्योति बन कर रहते हो रवि में और सुधाकर में
तुम ज्ञानमयी- विज्ञानमयी विद्या के परम प्रदाता हो
तुममें सब है सब में तुम हो बाहर भी तुम, तुम ही उर में
तुम शाश्वत सत्य सनातन हो, प्रतिबिम्बित कण कण में
तुमसे ही मिलता सुख-वैभव नवनिधि प्रवर प्रदाता हो
तुम पावन परमेश्वर ऐसे गुण जिनके जग गाता हो
निर्बल मन और चित्त हमारा, तुम सब कष्टों के त्राता हो
तुम उदार, उज्ज्वल, वरेण्य तुम जन जन के मन ज्ञाता हो
तुम शाश्वत सत्य सनातन हो, प्रतिबिम्बित कण कण में
तुम शाश्वत सत्य सनातन हो प्रतिबिम्बित कण कण में
तुम हो जल में थल में नभ में पावक और समीरण में
तुम ही हो वह कठिन कुलिश, तुम ही कोमल कुसुम प्रभो
तुम त्रिकाल तुम महाकाल तुम लय में और क्षरण में
तुम शाश्वत सत्य सनातन हो, प्रतिबिम्बित कण कण में
रामनारायण सोनी
१७.०२.२३
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