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Saturday, 4 February 2023

चीटियाँ हैं ये

चीटियाँ ये चीटियाँ
न दो इन्हें चुनौतियाँ

धर्म की देवियाँ हैं वे, 
साहस का प्रतिमान है वे, 
कर्म का विधान हैं वे, 
श्रम का संधान हैं वे। 
चलते चलते थकती नहीं है कभी, 
छाँव देख कर भी रुकती नहीं है कभी, 
पहाड़ के सामने भी झुकती नहीं है कभी।
चीटियाँ ये चीटियाँ
न दो इन्हें चुनौतियाँ

विश्वकर्मा ही हैं बसा इनमें 
देख लो बमीलों के वास्तु शिल्प को, 
विश्वधर्मा ही हैं ये 
देख लो उनके प्रशान्त कर्मक्षेत्र को, 
विश्वबन्धु हैं ये 
देख लो इनके सहअस्तित्व को, 
विश्वविमोहिनी हैं ये 
देख लो इनके रूप को स्वरूप को।
चीटियाँ ये चीटियाँ
न दो इन्हें चुनौतियाँ

संगठन की शक्ति ले , 
स्वामिनी की भक्ति ले , 
जीवनी की संतृप्ति ले, 
दायित्वों में अनुरक्ति ले 
अजेय हैं, प्रमेय है, विधेय है 
चीटियाँ ये चीटियाँ
न दो इन्हें चुनौतियाँ

मौसमों की मार हो, 
छुरों की तीखी धार हो, 
सिन्धु का सा क्षार हो, 
जीत हो या हार हो, 
मुँह में चाहे भार हो, 
शत्रु के प्रहार हों, 
कब डरी है चीटियाँ। 
चीटियाँ ये चीटियाँ
न दो इन्हें चुनौतियाँ

भित्तियों को लाँघ कर, 
तृणों के सेतु बाँध कर, 
दिशाएँ देख भाल कर, 
स्वप्न मन में ढाल कर, 
कदम कदम संभाल कर,
सभी जगह खंगाल कर,
बढ़ रही है चीटियाँ। 
चीटियाँ ये चीटियाँ
न दो इन्हें चुनौतियाँ

न इनका कोई जोड़ है
न जिन्दगी में मोड़ है
बसा है एक नगर यहाँ
जुड़ा है एक सफर यहाँ
रानी ही का राज्य है
परिवार अविभाज्य है
असत्य यहाँ त्याज्य है
तभी यहाँ सुराज्य है।
चीटियाँ ये चीटियाँ
न दो इन्हें चुनौतियाँ

अरे मनुज सुनो जरा
प्रबन्ध देख लो जरा
श्रेणियों के भेद है
कर्म के प्रभेद है
श्रमिक लगे हैं कार्य में
सैनिकों के फौज है
प्रचुर यहाँ आहार है
मौज का विहार है।
चीटियाँ ये चीटियाँ
न दो इन्हें चुनौतियाँ

रामनारायण सोनी
04.02.23




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