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Wednesday, 19 October 2022

दो पल की पहिचान

अपने जीवन के सब से खास
इस हृदय की शिला पर
लिखे अमिट पल 
स्मरण करते ही
भीतर से बाहर तक 
रोमांच से भर जाता हूँ
पुलक का वह पल
हटात् जब नजरें हुई थी चार
और अतिरेक का वह दूसरा पल
जब जब रूह घुली रूह में
न भूला मैं
न भूल सकोगे तुम!

रामनारायण सोनी
२०.१०.२२

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