. ll नवगति, नवलय, ताल-छन्द नव ll * सम्वेदनाओं के विविध आयाम *
एक रिश्ता जो आदत बन गया
एक आदत जो लत हो गई एक लत जो छोड़े नहीं छूटती रिश्ता जो मंजिल नहीं सफर था सफर जो ख्वाहिशों की पगडण्डियों से गुजरा पगडण्डी जो इस दिल से उस दिल को महीन, मुलायम, पवित्र रिश्ते से जोड़ती है
रामनारायण सोनी १७.१०.२२
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