आत्मा का आह्लाद
गूँगा जो बोलता है,
बहरा जो सुनता है,
बिना आँख के भी जो देखता है
वह भाषा है, बोली है, जुबान है
वह केवल 'मौन' है
वह सन्नाटा है, वह निस्पन्द है।
फुसफुसाहट, शोर, दहाड़, गर्जन
बहुत सुने होंगे, पर
सुनो इस मौन को
यह 'अनहद नाद' है
शरीर का नहीं, मन का नहीं
आत्मा का आह्लाद है
रामनारायण सोनी
13.03.23
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