तुम्हारी मौजूदगी
तुम्हारी मौजूदगी
मेरे जीवन में
बसन्त की सुहानी सुबह में
एक खिला हुआ गुलाब है
ग्रीष्म की चिलचिलाती धूप में
गुलमोहर का फूल है
वर्षा में झिरमिराती फुहार है
शरद ऋतु में कमलदल पर
ठहरी हुई शबनम है
हेमन्त में गुनगुनाती धूप है
शिशिर में रुई के फाहों जैसा
बरसता हिम है
तुम्हारी मौजूदगी
अस्ताचल को जाते सूर्य की
सुनहरी किरण है
अँधेरी रात में
टिमटिमाता तारा है
बरखा की बूँदों पर
चित्रलिखा इन्द्रधनुष है
और ठिठुरती शरद में
तृणों का नोक पर आसन्न
रजतमयी ओस कण है
तुम्हारी मौजूदगी
जलतरंग से उठती हुई
मधुमय रागिनी है
और इन से भी परे
तुम्हारी उपस्थिति
मेरे जीवन का गीत-संगीत है
रामनारायण सोनी
२.३.२३
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