विस्तारण मेरे हृदय का
देख नहीं पाये हो तुम
क्योंकि इसी में तो हो तुम
प्रस्रवन देखा ही नही तुमने
मेरे अजस्र प्रेम का
क्योंकि घुलमिल गये हो इसीमें तुम
स्पन्दन मेरे हृदय का
शायद नही होगा महसूस तुम्हें
क्योंकि स्पन्दन हमारे तुम्हारे हृदय के भी
लयलीन हो कर ये गड्डमड्ड गये हैं
और इसलिये भी कि
एकमेक हो गये हैं हम और तुम
रामनारायण सोनी
१५.०३.२२
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