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Thursday, 25 May 2023

ठीक ही तो है

तुमने खूब बाँटा
पर बँटे नहीं हो
क्योंकि बाँटना अभी और भी है
तुम घटे नहीं, न ही घटी चमक
क्योंकि तुम 
शुक्ल पक्ष के चन्द्रमा हो
चाँदनी तुम्हीं से तो है!
तुम रुके नहीं
क्योंकि तुम सदा नीरा नदी हो
तुम्हारे किनारों पर
कई गाँव, कई शहर 
कई खेत, कई पंछी प्यासे हैं
तुमसे ही मल्लाहों के घर चूल्हे जलेंगे
तुम पिघले हो 
करुणा से भर कर
क्योंकि फूँस के उन टप्परों में
जिन्दगियाँ जोह रही थी बाट
पथराई निगाहों से तुम्हारी ही
बरस रहे हो
नेह के मेह ले कर
ऐसे ही बने रहना है तुम्हें
नित्य, निरन्तर, अविचल, अविकल

रामनारायण सोनी
२५.०५.२३ 

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